Tuesday, 19 November 2013

डा. हरिवश राय बच्चन जी का पत्र माधव शुक्ल 'मनोज' के नाम



भूली-बिसरी याद
डा. हरिवश राय बच्चन जी का पत्र  5 नवम्बर 1964
माधव शुक्ल 'मनोज' के नाम पुस्तक ‘एक नदी कंठी’ के बारे में....

सम्मान्य बंधु
एक नदी कंठी सी की प्रति के लिए आभारी हूं
इधर-उधर उलटने पलटने को पुस्तक उठाई थी कि पूरा पढ़ गया। यह आकर्षण की कम उपलब्धि नहीं।
आप भाव समृद्ध हैं और आप की भावना नये बिम्बों को स्वतंत्रता से पकड़ती है। आप की उन्नति-प्रगति के लिए मेरी शुभकामना स्वीकार कें। आप की कृतियों से भी परिचय प्राप्त करने का अभिलाषी हूं। स्मरण के लिए आभारी
विनम्र-बच्चन

डा. हरिवश राय बच्चन जी को माधव शुक्ल 'मनोज' की यह कविता बहुत पसंद आई और उसी शैली में कुछ कवितायें धर्मयुग में भी लिखी थी।
                                                                                         
फल की स्वर लिपि



हम ऐसे फल हैं
जो डाल से टपक कर
पास की अंधेरी खाईयों में
झुरमुटों में लुड़क कर
सूखी पत्तियों में ढंक गये हैं।

हमने बहुत चाहा
बता दें-हम यहां हैं
अंधेरी खाईयां पकड़े हुए हैं
झुरमुटें हमको लपेटे हुए हैं
कांटे सभी नोकें गढ़ाये हैं
सूखी सड़ी ये पत्तियां
मुंह दबाये हैं।

हम तो सभी के पास आना चाहते हैं
वृक्ष में फिर से लटकना चाहते हैं
हम संतोष को सिर पर लगाकर सोचते हैं
कुछ देर ऐसा ही सही
इस आज को मंजूर शायद है यही ?








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